मैं तोक्यो अपने देश के लिए आई हूं और अपना 100 परसेंट दूंगी…आत्मविश्वास से लबरेज हैं मनिका बत्रा

मैं तोक्यो अपने देश के लिए आई हूं और अपना 100 परसेंट दूंगी…आत्मविश्वास से लबरेज हैं मनिका बत्रा
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मैं तोक्यो अपने देश के लिए आई हूं और अपना 100 परसेंट दूंगी…आत्मविश्वास से लबरेज हैं मनिका बत्रा
मैं तोक्यो अपने देश के लिए आई हूं और अपना 100 परसेंट दूंगी…आत्मविश्वास से लबरेज हैं मनिका बत्रा
नई दिल्ली
खेलों का महाकुंभ कहे जाने वाले ओलिंपिक का आगाज शुक्रवार से हो रहा है। कोरोना की वजह से तोक्यो ओलिंपिक एक साल देरी से हो रहे हैं। इस बार भारतीय टुकड़ी से लोगों की उम्मीदें बहुत ज्यादा हैं। इस बार का भारतीय दल मजबूत और तैयारियों से लबरेज हैं। खिलाड़ी किसी भी तरह की टेंशन लिए बिना अपने खेल पर ध्यान लगाए हुए हैं। टेबल टेनिस में भारत का प्रतिनिधित्व करने गईं मनिका बत्रा ने हमारे सहयोगी टाइम्स ऑफ इंडिया से बातचीत की। उन्होंने कहा कि मैं इस ओलिंपिक को एन्जॉय करना चाहती हूं, मैं अपना 100 परसेंट देना चाहती हूं और खुद सरप्राइज्ड करना चाहती हूं।

मनिका बत्रा को 2018 राष्ट्रमंडल खेलों में और फिर उसी वर्ष एशियाई खेलों के बाद पूरी दुनिया जानने लगी थी। इन दो टूर्नामेंट्स में मनिका ने दो स्वर्ण, एक रजत और दो कांस्य के साथ पांच पदक जीते। राष्ट्रमंडल खेलों में महिला एकल में उनका स्वर्ण और फिर शरथ कमल के साथ मिश्रित युगल में एशियाई खेलों का कांस्य पदक कई मायनों में भारतीय टेबल टेनिस के लिए महत्वपूर्ण क्षण थे।

मानसिक रूप से तैयार होना अहम- मनिका बत्राउनसे जब इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि हां, मैं बहुत खुश हूं बेशक पूरी तरह से संतुष्ट नहीं हूं। क्योंकि कोई भी खिलाड़ी कभी भी किसी टूर्नामेंट के लिए अपनी तैयारी से पूरी तरह संतुष्ट नहीं होता है। लेकिन मैं इस बार अपनी तैयारी से खुश हूं। 2016 के खेलों से पहले मैं इस बार की तरह तैयार नहीं थी। इस बार मैंने पुणे में अपने सभी सपोर्ट स्टाफ- कोच, फिजियो और स्पैरिंग पार्टनर जो बेलारूस से हैं उनके साथ जो ट्रेनिंग की है, वह बहुत अच्छी रही है। मैं शारीरिक और मानसिक रूप से भी तैयार हूं। मानसिक रूप से तैयार होना महत्वपूर्ण है।

मैं अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करना चाहती हूं- मनिकामनिका बत्रा कहती हैं, ‘मेरे दिमाग में है कि मैं अपने देश के लिए तोक्यो ओलिंपिक में हूं और मैं अपना सर्वश्रेष्ठ दूंगीं, चाहे कुछ भी हो जाए। मैं अपना शत-प्रतिशत दूंगी। लेकिन मैं खेलते समय अपने ऊपर वह दबाव नहीं डालूंगा कि मुझे जीतना है। मेरे दिमाग में यह विचार जरूर आएगा कि मुझे अपने देश के लिए जीतना है, लेकिन मैं खुद पर दबाव नहीं बनाना चाहती।’ बत्रा ने आगे कहा कि मैं सिर्फ आनंद लेना चाहती हूं और अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करना चाहती हूं। मैं खुद को हैरान करना चाहती हूं।

तोक्यो के लिए काफी पहले से शुरू की तैयारीअपने आपको तोक्यो के माहौल में परिवर्तिन करने के सवाल में उन्होंने कहा कि मैं ऐसा परिदृश्य नहीं चाहती जहां मैं सुबह जल्दी अभ्यास करूं और सोता रहूं। मैं इसके लिए खुद को तैयार कर रही थी। मैं सुबह 4 बजे उठ रहा थी और अभ्यास सुबह 5 बजे निर्धारित था। यह खुद को मानसिक और शारीरिक रूप से तैयार करने के लिए किया गया था। मैं सुबह के सत्र में और मैच खेलने की कोशिश कर रही थी। उस समय शरीर आमतौर पर आलसी और थका हुआ होता है और मैं नहीं चाहता कि ओलिंपिक में ऐसा हो, इसलिए मैं उस शेड्यूल का पालन पहले से ही कर रही थी।

राज्यवर्धन सिंह राठौर से मिली प्रेरणामनिका बत्रा आगे कहती हैं, ‘जब मैंने अपना पहला अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट खेला था तब मैं 16 साल की थी और 2011 में मैंने (कासुमी) इशिकावा (सैंटियागो, चिली में एक अंडर-21 मैच में को हराया था। जब वह दुनिया में चौथे स्थान पर थी। वह एक ओलंपियन थी, इसलिए मैंने सोचा, अगर मैं उसे हरा सकती हूं, तो मैं भी जाकर ओलिंपिक खेल सकता हूं। जब कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौर ने 2004 एथेन ओलंपिक में रजत पदक जीता था – जिसने मुझे ओलंपिक में पहुंचने और अपने देश के लिए खेलने की कोशिश करने के लिए बहुत प्रेरणा दी। मुझे लगा कि मुझे अपने देश के लिए भी जीतना है और ओलंपिक में अपने देश का प्रतिनिधित्व करना है।

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