ज्ञान रूपी धन को कोई छीन नहीं सकता: सुप्रिया

ज्ञान रूपी धन को कोई छीन नहीं सकता: सुप्रिया

■ खुटहा डीह में महायज्ञ के दौरान बह रही ज्ञानरूपी गंगा की धारा

बड़हिया.

प्रखंड के खुटहा डीह में भव्यकलश शोभायात्रा के साथ शुरू हुए महायज्ञ के बीच पहले दिन जहां यज्ञाचार्य द्वारा सभी यजमानों को सविधि मंडप प्रवेश कराया गया. तो वहीं देर शाम से ज्ञान की गंगा प्रवाहित होनी शुरू हो गयी. पहले दिन के प्रवचन में अंतरराष्ट्रीय बाल कथाकार सुप्रिया आनंदऔर अमृत आंनद की जोड़ी ने जन मानस को मानवीय जीवन का सदुपयोग वर ज्ञान की आवश्यकता व महत्ता को रखा. इससे पूर्व कथा व्यासपीठ के साथ ही श्रीमद्भागवत समेत नटनागर की आरती की गयी. सस्वर भजन के बीच रासलीला का शुभारंभ भव्य

आरती से हुई, जिसे यज्ञाधीश श्रीकृष्णदेवाचार्य, दंडी स्वामी अनंतानंद सरस्वती, वृंदावन दास एवं यज्ञ समिति सचिव

रामशोभा सिंह के द्वारा संयुक्त रूप से किया गया. सुप्रिया व अमृत आनंद की जोड़ी ने मानव तनको कलश और ज्ञान को

अमृत बताते हुए कहा कि ज्ञान रूपी धन चल और अचल संपत्ति है. जिसे न कोई आपसे छीन सकता है और न ही कोई चोरी कर सकता है. परंतु इसे जितना बांटा जाय बढ़ता ही जाता है. मनुष्य जीवन की सार्थकता ज्ञान को अर्जित करने में ही है. जिसे जीवन के आखिरी क्षण तक बनाये रखना चाहिए, वहीं देर रात शुरू हुए रासलीला में हर उम्र के श्रद्धालुओंकी बेहतर उपस्थिति रही. जिनके बीच श्रीकृष्ण के लीलाओं का चरित्र चित्रण करते हुए श्री कृष्ण के मानवीय जीवन की उपलब्धियों में छिपे सामाजिक व नैतिक शिक्षाओं से अवगत कराया जाता रहा.

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